राजभवनो की तरफ न जाये फरियादे पत्थरो के पास अभ्यंतर नहीं होता | ये सियासत की तवायफ का दुप्पट्टा है ये किसी के आंसुओं से तर नहीं होता . लफ्जों में हुंकार बिठा ,लहजों में खुद्दारी रख, जीने की ख्वाहिश है तो मरने की तैयारी रख .
Saturday, 15 December 2012
Tuesday, 25 September 2012
Wednesday, 5 September 2012
Saturday, 9 June 2012
Thursday, 10 May 2012
Monday, 12 March 2012
Friday, 10 February 2012
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